सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

दिसम्बर 28, 2008 को 3:26 पूर्वाह्न | Posted in सरफ़रोशी की तमन्ना | 28 टिप्पणियाँ
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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।

यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर

 खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से

और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न
जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम

 जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज

 दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है

 

नमन है, तुम्हें.. ओ अमर शहीद

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28 टिप्पणियाँ »

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  1. नववर्ष् की शुभकामनाएं
    कलम से जोड्कर भाव अपने
    ये कौनसा समंदर बनाया है
    बूंद-बूंद की अभिव्यक्ति ने
    सुंदर रचना संसार बनाया है
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    http://www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    http://www.chitrasansar.blogspot.com

  2. आपका स्वागत है। नव वर्ष की ढेरों बधाई।

  3. बहुत प्रभावशाली रचना है ।

    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख िलखा है- आत्मिवश्वास के सहारे जीतंे िजंदगी की जंग-समय हो पढें और प्रितिक्रया भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com


  4. @ श्री भारती, बादल जी एवं डा. अशोक
    प्रारंभिक उत्साहवर्धन के लिये अतिशय धन्यवाद !
    आशीर्वाद दें कि मैं अपने प्रयास में सफलता प्राप्त कर सकूँ !

  5. आपका न केवल स्वागत बल्कि धन्यवाद ये बहुमूल्य रचना देने के लिए…..

  6. वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
    हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

    इसके बाद कुछ कहना मुनासिब नही

  7. इस अमूल्य प्रयास के लिए साधुवाद. इस पर और जानकारी की प्रतीक्षा रहेगी. e-mail द्वारा प्राप्ति के लिए apply कर दिया है. शुभकामनाएं.

  8. इस विषय को अन्तर्जाल पर रखने से ज्यादा श्रेष्ठ कार्य क्या होगा? आपको इसके लिये बहुत धन्यवाद. ये चिठ्ठा खुलने मे मुझे थोडी दिक्कत हो रही है. कुछ जोगाड लगवाता हूं. मेरा सौभाग्य कि आपकी कृपा से इस विषय पर पाठकों को बहुत कुछ जानने को मिलेगा.

    रामराम.

  9. बहुत बढ़िया!

  10. भारत माँ के सच्चे सपूतों को इससे अच्छी आदरांजली कुछ नहीं हो सकती…साधुवाद…धन्यवाद

  11. बहुत अच्छा विवरण है……..रोम रोम में आपने देशभक्ति को जगा दिया…….

  12. अत्यंत सराहनीय कार्य। ब्लाग पर कुछ नि:स्वार्थ कार्य भी हो रहे हैं, ये ब्लाग इसका प्रमाण है।

  13. डॉ. अमर जी, जब इस ब्लॉग पर पोस्ट करते हैं, तो एक विकल्प इसके लिंक को बदलने का भी होता है. तो उसे आप हिन्दी जो डिफ़ॉल्ट से तय होता है, उसे मिटाकर मिलते जुलते अंग्रेजी (रोमन हिन्दी भी चलेगा) से बदल दें तो कहीं कहीं कड़ियाँ क्लिक करने पर काम नहीं करतीं वो समस्या नहीं होगी.

  14. पिछली कड़ियाँ भी आज ही पढीं. बिल्कुल अलग ही दुनिया की बात लगती है जहाँ दादी परम्परा की रक्षा के लिए अपनी पोशन की ह्त्या की वकालत करती है, पिटा बच्चे को बन्दूक के गज से इतना मारता है की वह दो दिन तक उठ न सके, और दो साल का बालक चिमगादड़ का खून पीता है, उस दुनिया में रहकर बिस्मिल जी की विचारवान सोच अनुकरणीय है.

  15. देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत चरितार्थ हो रही है. इतनी सुंदर भावनाओं को आप ने बड़ी सहजता से व्यक्त किया है. एक माह से हम ब्लोगों पर नहीं जा पा रहे है. नेट काम नहीं कर रहा था या एक दम धीमा हो गया था. कुछ कुछ कठिन शब्दों का हिन्दी रूपांतर भी नीचे दे दें तो हम जैसे अल्प ज्ञानियों को सुविधा होगी.आभार.

  16. आदरणीय डा. अमर कुमार जी;
    आपका काकोरी कांड का ब्लाग देखा.
    ये किताब मुझे मेरे बचपन में मेरे नानाजी ने दी थी और मेरी हार्दिक इच्छा थी कि इसे इन्टरनेट पर उपलब्ध हो. मैंने इसे स्कैन करके ई-बुक बनाया भी लेकिन 16 एमबी के साइज के कारण इसे डाउनलोड कराने के लिये देना संभव नहीं रहा. आप इसे प्रस्तुत करके मेरी आकांक्षा को कार्यरूप दे रहे हैं.
    बहुत बहुत धन्यवाद
    सादर आपका
    मैथिली

  17. हम पैचान लिये हैं, सरफरोशी की तमन्ना की टक्कर की तो आज तक कोई तमन्ना नही हुई।

  18. Hi, it is nice to go through ur blog…well written..by the way which typing tool are you suing for typing in Hindi..?

    i understand that, now a days typing in an Indian language is not a big task… recently, i was searching for the user friendly Indian language typing tool and found.. ” quillpad”. do u use the same..?

    Heard that it is much more superior than the Google’s indic transliteration…!?

    expressing our views in our own mother tongue is a great feeling…and it is our duty too…so, save,protect,popularize and communicate in our own mother tongue…

    try this, http://www.quillpad.in
    Jai..Ho…

  19. दादा इस पोस्ट का नाम ठीक करे काकोरी षडयंत्र वो था जिसमे एक बंदे ने मुखबरी की थी . ये तो काकोरी कांड था जैसे रामचरित मानस मे कांड है ठीक वैसे ही . इसे षडयंत्र अग्रेज कह सकते है हम नही
    हमारे लिये तो ये एक महान कार्य की तरह पूजा योग्य कार्य था इन महान सेनानियो का
    देह शिवा वर मोह यह शुभ करमन ते कबहु ना डरो
    ना डरो अरि सो जब जाय लरो , निस्चय कर अपनी जीत करो

  20. इस नज़्म ने जो रोल अदा किया है आजादी की लडाई में और जज्बा अमित हैं .

    नमन !

  21. good

  22. Isase achchi baat ho hi nahin sakti shreemanji apko bahut bahut sadhuwad
    hamare khoye swabhiman ko jagane ke liye jaroori hain ye jeevandayee itihas ke panne

  23. इतिहास को बखूबी आपने परोषा है। मेरा भी यही विचार है कि इतिहास को संजोना नही चाहिए बल्कि इससे क्रन्तिकारी सिख लेनी चाहिए। रामप्रसाद विश्मिल को भुला नही जा सकता बल्कि उन्हें तो इतिहासिक पुरूष के रूप में याद करना चाहिए। भारत के आजादी की सन्दर्भ में उनकी खास भूमिका है।

  24. अमर जी, प्रणाम,
    मेरे ब्लॉग पर आने के लिए धन्यवाद्, मुझे पता ही नहीं था कि इस तरह का कोई ब्लॉग है जो इन बूले बिसरे नायकों कि याद हमें दिलाता रहे, मैं तो आपके इस प्रयास को ही आगे बढ़ाने का काम कर रहा हूँ, अपना स्नेह मुझ पर बनाए रखें!

  25. एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं !

  26. बहुत अच्छा लगा इस रचना को यहाँ पढ़ना …आभार

  27. ” हाँ सरफरोशी की तमन्ना अब भी हमारे दिल में है”
    हाँ सरफरोशी की तमन्ना अब भी हमारे दिल में है !!
    ओ रे बिस्मिल ! काश आते आज तुम हिन्दोस्तां !
    देखते की मुल्क सारा क्या “टशन”-महफ़िल में है !
    आज के जलसो…ं में बिस्मिल एक गूंगा गा रहा !
    … और बहरों का वो रैला नाचता महफ़िल में है !!
    हाथ की खादी बनाने का ज़माना लद गया !
    आज तो चड्डी भी सिलती अंग्रेजों के मिल में है !!
    सरफरोशी की कविता, हम बताओ क्यूँ …पढ़ें !
    अपनी आज़ादी तो अब पोइम : जेक एंड जिल में है !
    आज भारत मिट गया, पर इण्डिया अपने दिल में है !
    बोल-बाला फिरंगियों का आज की महफ़िल में है !!
    पर सरफरोशी की तमन्ना अब भी हमारे दिल में है !
    हाँ सरफरोशी की तमन्ना अब भी जमारे दिल में है !!
    कातिलों से क्या लड़ें, अब जान प्यारी है हमें !
    इसलिए तो आज बैठे, बन चूहे अपने बिल में हैं !!
    आज का लौंडा ये कहता : “हम तो बिस्मिल थक गए” !
    अपनी आज़ादी तो भैया, लौंडिया के दिल में है !!
    पूछो अपने आप से क्या तुम्हारे दिल में है !
    फिर बताना आसमां को क्या हमारे दिल में है !
    पर सरफरोशी की तमन्ना अब भी हमारे दिल में है !
    हाँ सरफरोशी की तमन्ना अब भी जमारे दिल में है !!
    Disclaimer: we are not point at any one here so please do not take it personally .
    ??????
    .(♥.♥).
    .
    ._/H\_ …·•●♥.ιмяαη.♥●•·See more


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